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ज्योतिष लेख

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प्रेम विवाह के ज्योतिषीय योग !!

जब किसी लड़का और लड़की के बीच प्रेम होता है तो वे साथ साथ जीवन जीने की इच्छा रखते हैं और विवाह करना चाहते हैं. कोई प्रेमी अपनी मंजिल पाने में सफल होता है यानी उनकी शादी उसी से होती है जिसे वे चाहते हैं और कुछ इसमे नाकामयाब होते हैं!

"शुक्र ग्रह" को ज्योतिषशास्त्र में प्रेम का कारक माना गया है ,कुण्डली में लग्न, पंचम, सप्तम तथा एकादश भावों से का शुक्र सम्बन्ध होने पर व्यक्ति प्रेमी स्वभाव का होता है. प्रेम होना अलग बात है और प्रेम का विवाह में परिणत होना अलग बात है. ज्योतिषशास्त्र अनुसार पंचम भाव प्रेम का भाव होता है और सप्तम भाव विवाह का. पंचम भाव का सम्बन्ध जब सप्तम भाव से होता है तब दो प्रेमी वैवाहिक में सूत्र बंधते हैं. नवम भाव से पंचम का शुभ सम्बन्ध होने पर भी दो प्रेमी पति पत्नी बनकर दाम्पत्य जीवन का सुख प्राप्त करते हैं! ऐसा नहीं है कि केवल इन्हीं स्थितियो मे प्रेम विवाह हो सकता है. अगर आपकी कुण्डली में यह स्थिति नहीं बन रही है तो कोई बात नहीं है हो सकता है कि किसी अन्य स्थिति के होने से आपका प्रेम सफल हो और आप अपने प्रेमी को अपने जीवनसाथी के रूप में प्राप्त करें. पंचम भाव का स्वामी पंचमेश अगर शुक्र सप्तम भाव में स्थित है तब भी प्रेम विवाह की प्रबल संभावना बनती है अगर शुक्र अपने घर में मौजूद हो तब भी प्रेम विवाह का योग बनता है! अगर शुक्र लग्न स्थान में स्थित है और चन्द्र कुण्डली में शुक्र पंचम भाव में स्थित है तब भी प्रेम विवाह संभव होता है अगर लग्न कुण्डली में प्रेम विवाह योग नहीं है और नवमांश कुण्डली में सप्तमेश और नवमेश की युति होती है तो प्रेम विवाह की संभावना बनती है. शुक्र लग्न में मौजूद हो और साथ में लग्नेश हो तो प्रेम विवाह|

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