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ज्योतिष लेख

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पाराशरी सिधांत में अष्टकवर्ग पद्धति का एक सूत्र !!

"कोई भी ग्रह अपनी उच्च,स्वराशी या मित्र राशि में होने के उपरान्त भी , तब तक पूर्णरूप से शुभ फल देने की क्षमता नहीं रखता जब तक उसके पास अपने भिन्नाअष्टक वर्ग में पर्याप्त बिंदु नहीं होते "


ज्योतिष शतप्रतिशत विज्ञानं है!!

आज सब देख रहे है की समाज में ज्योतिष की लोकप्रियता बढती जा रही है, मांग और पूर्ति का भी एक सिधांत है की जब किसी चीज की मांग ज्यादा बढ़ जाती है तो वहां कुछ न कुछ गलत होने लगता है आज हमें सोचना चाहिए की माता सीता का हरण करने के लिए रावण को एक साधू का भेष धारण करना पड़ा था आखिर इसलिए ही की साधू के प्रति माता सीता आस्था रखती थी और आसानी से रावण उनकी भावनात्मक स्थितियों का गलत इस्तेमाल कर उनका हरण कर लंका ले जाने में कामयाब हो जायेगा ! ठीक इसी प्रकार आज जब ज्योतिष का प्रचार - प्रसार तथा लोकप्रियता बढ़ रही है तो कुछ लोग धन के लोभवश ज्योतिष के अधकचरे ज्ञान का उपयोग कर स्वयं तो अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं पर ज्योतिष जो वैदिक ऋषियों तथा वेदों का अमूल्य ज्ञान है उसकी लोकप्रियता तथा विश्वसनीयता को छति हो रही है ! आज समाज में यह देखने को मिलता है की वैज्ञानिक तथा अन्य नास्तिक लोग देश के विख्यात ज्योतिषियों से टीवी के प्रोग्रामो में चुनौती देते हैं की वह ज्योतिष की विश्वसनीयता सिद्ध करें टीवी प्रोग्राम में पुरे जनमानस के सामने ज्योतिषी यह सिद्ध नहीं कर पाते की ज्योतिष विज्ञानं है क्यों कारण सिर्फ इतना सा है की उनके ज्ञान पर भौतिकता और लालच का पर्दा पड़ा है ! ज्योतिष धन उपार्जन का साधन हो सकती है पर ज्योतिष साधना का विषय है और साधना वातानुकूलित कमरों में रहकर नहीं हो सकती टीवी पर प्रोग्राम देखकर इन ज्योतिषियों को तो शरम नहीं आइ होगी पर प्रोग्राम देखकरमुझ जैसे या जो भी ज्योतिष प्रेमी हैं उनको जरुर दर्द होता होगा ,होना भी चाहिए , इस जगत में कोई भी विज्ञानं पूर्ण नहीं है पूर्ण सिर्फ परमात्मा है तो फिर ज्योतिष विज्ञानं की ही प्रमाणिकता क्यों मांगी जा रही है कारण ये जो भी कथाकथित ज्योतिष के विद्वान हैं सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के चक्कर में राशिफल , भविष्यवानियाँ टीवी , पत्रिकाओं, अखबारों आदि में करते है जिन्हें हल्दी का रंग मालूम नहीं है पंसारी बने धूम रहे है दस्तखत करना आता नहीं कलक्टर बनाने का फार्म भर रहे हैं ! अरे भाई एक राशी के करोडो लोग हैं आप एक लाठी से सभी को हांके जा रहे हो ..मुर्खता करना अब भी बंद कर दो अपना नहीं तो कम से कम जिस ज्योतिष से तुम्हारी रोटी चल रही है उसकी ही खातिर सही ... अरे भाई फल खाओ तो खाओ वृक्ष पर तो तरस खाओ प्यारे ! अब रही बात ज्योतिष की तो भई एक अस्पताल में एक ही मर्ज के पाँच मरीज भर्ती हुए एक ही कमरे में भर्ती किये गए एक ही डाक्टर इलाज करता है परिणाम ... एक मरीज दो दिन में , दूसरा तीन दिन में , चौथा चार दिन में ठीक हो जाते है पांचवा ठीक नहीं होता ओपरेशन करना पड़ता है फिर भी मर जाता है तो क्या अस्पताल की विश्वसनीयता पर या डाक्टर की विश्वसनीयता पर या दवाइयों की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लगाना चाहिए .. नहीं .. बिलकुल नहीं ,, प्रत्येक मरीज की अपनी रोग प्रतिकारक शक्तियां है जो की भिन्न भिन्न हैं ठीक उसी तरह ज्योतिष विद्या भी है जो की भिन्न भिन्न जातको की भिन्न भिन्न समस्याओं का इलाज़ ज्योतिष्य तरीके से करती है लेकिन किसी भी जातक के प्रारब्ध दुसरे जातक जैसे नहीं हो सकते और इसी विशेष कारण उसकी समस्या के निदान में समय लगना या कई बात लाइलाज भी रह जाना स्वाभाविक है !!

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