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ज्योतिष लेख

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गोचर में भवत-भावम का एक लाभकारी महत्वपूर्ण सूत्र !!

कुंडली में लग्न से नवां भाव भाग्य स्थान होता है.भाग्य स्थान से नवां भाव अर्थात भाग्य का भी भाग्य स्थान पंचम भाव होता है.द्वितीय व एकादश धन को कण्ट्रोल करने वाले भाव होते हैं.तृतीय भाव पराक्रम का भाव है.अततः कुंडली में जब भी गोचरवश पंचम भाव से धनेश,भाग्येश ,व पराक्रमेश का सम्बन्ध बनेगा वो ही समय जीवन का शानदार समय बनकर आएगा.ये सम्बन्ध चाहे ग्रहों की युति से बने चाहे आपसी दृष्टि से बने.मान लीजिये की वृश्चिक लग्न की कुंडली है.अब इस कुंडली में गुरु चाहे मीन राशि में आये ,या कहीं से भी मीन राशि पर दृष्टि डाले,साथ ही शनि भी चाहे मीन राशि पर आये या उस पर दृष्टि रखे,एवम इसी समीकरण में जब जब भी चन्द्रमा मीन पर विचरण करे या दृष्टिपात करे वह वह दिन व वह समयकाल उस अनुपात से शानदार परिणाम देने लगेगा.

इसी तरह किसी भी कुंडली में जब जब भी तृतीय स्थान का अधिपति अर्थात पराक्रमेश अपने से भाग्य भाव में अर्थात कुंडली के ग्यारहवें भाव विचरण करने लगें तो ये वो समय है जब जातक जितना अधिक मेहनत करेगा उतना अधिक आय प्राप्त करेगा.यहीं से जब पराक्रमेश अपने से दशम यानि लग्न से द्वादश भाव में जाएगा ,जरा सी भी मेहनत जातक के काम धंदे को बरकत पहुँचाने का काम करेगी कुंडली में तृतीय व द्वादश भावों को दुष्ट भाव कहा गया है.इसी क्रम में माना जाता है की बुरा कभी बुरे के लिए बुरा नहीं करता.अततः इसे यूँ न समझकर की पराक्रमेश व्यय भाव में जाकर ख़राब फल देता है अपितु यह देखे की अब जातक की मेहनत उसे समाज में नाम व स्थान दिलाने वाली है.जितना अपने कार्य में वह ईमानदारी से परिश्रम करेगा उसकी मेहनत उसे उतने ऊंचे मुकाम पर पहुंचाएगी .अततः यह जी जान से काम में जुट जाने का समय होता है!!!!.


शुक्र और चन्द्र ग्रह सुन्दरता के प्रतीक!!

सुन्दरता अपने आप में एक खजाना है। जिसको भगवान ये खजाना देता है वह लोगों को सहज ही अपनी तरफ आकर्षित कर लेता है। इसलिए हर इंसान चाहता है कि वह सुन्दर दिखाई दें लेकिन हर व्यक्ति सुन्दर नहीं दिख सकता है क्योंकि ज्योतिष के अनुसार सुन्दरता जन्मकुंडली में बैठे ग्रहों के अनुसार होती है। शुक्र और चन्द्र दोनों ग्रह ज्योतिष में सुन्दरता के प्रतीक माने जाते हैं। जिसकी जन्मकुंडली में ये ग्रह शुभ स्थिति में बैठे होते हैं उन लोगों का व्यक्तित्व सभी को अपनी तरफ आकर्षित करता है। यदि कोई व्यक्ति शुक्र ग्रह से प्रभावित होता है तो उसके नयन नक्श सुन्दर होते हैं। ऐसे ही यदि किसी की कुंडली में चन्द्र उच्च का हो या शुभ प्रभाव देने वाला हो तो यह ग्रह सुन्दरता के साथ ही कामनीयता भी प्रदान करता है। ये दोनों ग्रह जिनकी कुण्डली में शुभ एवं मजबूत स्थित में हों उन्हें ये दोनों ग्रह रूप, सौन्दर्य एवं कोमलता प्रदान करते हैं।

सुन्दरता अपने आप में एक खजाना है। जिसको भगवान ये खजाना देता है वह लोगों को सहज ही अपनी तरफ आकर्षित कर लेता है। इसलिए हर इंसान चाहता है कि वह सुन्दर दिखाई दें लेकिन हर व्यक्ति सुन्दर नहीं दिख सकता है क्योंकि ज्योतिष के अनुसार सुन्दरता जन्मकुंडली में बैठे ग्रहों के अनुसार होती है। शुक्र और चन्द्र दोनों ग्रह ज्योतिष में सुन्दरता के प्रतीक माने जाते हैं। जिसकी जन्मकुंडली में ये ग्रह शुभ स्थिति में बैठे होते हैं उन लोगों का व्यक्तित्व सभी को अपनी तरफ आकर्षित करता है। यदि कोई व्यक्ति शुक्र ग्रह से प्रभावित होता है तो उसके नयन नक्श सुन्दर होते हैं। ऐसे ही यदि किसी की कुंडली में चन्द्र उच्च का हो या शुभ प्रभाव देने वाला हो तो यह ग्रह सुन्दरता के साथ ही कामनीयता भी प्रदान करता है। ये दोनों ग्रह जिनकी कुण्डली में शुभ एवं मजबूत स्थित में हों उन्हें ये दोनों ग्रह रूप, सौन्दर्य एवं कोमलता प्रदान करते हैं।

यदि कुंडली में शुक्र एवं चन्द्र की युति हो तो सुन्दरता मिलती है लेकिन, इनमें ध्यान देने वाली बात यह होती है कि इन दोनों ग्रहों की युति किस भाव एवं राशि में हो रही है। ग्रहों की दृष्टि तथा अन्य ग्रहों का इनपर प्रभाव भी काफी मायने रखता है।

चन्द्र ,शुक्र की युति और सौन्दर्य चन्द्र एवं शुक्र की युति किसी भाव में होने पर आमतौर पर यह माना जाता है कि व्यक्ति सुन्दर एवं आकर्षक होगा. परंतु, ज्योतिषशास्त्र के अनुसार चन्द्र शुक्र की युति किस राशि में हो रही है यह सौन्दर्य में विचारणीय होता है। शुक्र की राशि में शुक्र चन्द्र की युति वृष एवं तुला राशि में होती है. शुक्र जब अपनी राशि में होता है तो शुक्र की स्थिति मजबूत होती है

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